यमुना की लहरें मचाती शोर।
आसमान पर छा जाते बादल घनघोर।
मन खिल उठता देख नैसर्गिक सुंदरता।
ऐसी प्राकृती नज़र आती चहुँ ओर।
छँटते बादल तो होता उजियारा।
मन खिल उठता देख सुंदर नज़ारा।
तारे टिमटिमाते, चाँद चाँदनी बिखेरता।
देखते-देखते हो जाती सुंदर भोर।
रंग भरता कितने सुंदर जीवन की पतंग में।
उड़ाता मनमर्जी से किसी भी दिशा में।
चाहे उड़ाए ऊंँचा, चाहे काटे डोर।
हाथ में उसके सबकी डोर।
6.37pm 30 Sept 2026







