आ रहे बादल कभी घिर के, कभी निकल आती है धूप।
अद्भुत हैं प्रकृति के नियम अद्भुत इसके रूप।
धूप में रहें तो पसीने से तर हो जाए,
ठंड लगे जोर की जरा शाम में जो आएं।
कैसे-कैसे रंग दिखें, इस धरती पर हमको।
एक अलग मीठा एहसास कर जाते हैं सबको।
हम भी जब इसका ही एक हिस्सा हैं,
तो फिर क्यों हमारा अलग ही किस्सा है।
12.50pm 29 Sept 2026

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