वृक्ष हैं तो मैं हूँ, मैं हूं तो वृक्ष।
एक दूजे के बिन जिंदगी अधूरी है।
मैं दूंँ तुझको कार्बन डाइऑक्साइड,
तू दे मुझको ऑक्सीजन।
तभी हम और दुनिया पूरी हैं।
हम दोनों ही क्या .....
यह प्रकृति ही एक दूजे पर टिकी है।
जो सोचता है बिन तेरे मैं जी पाऊंँगा
उसकी तो मती अंँधेरे ने घेरी है।
आओ मिल जुल कर रहें हम।
जीएं और दूसरों को जीने दे हम।
प्रकृति और हम एक दूजे के पूरक हैं।
एक दूजे से ही है दुनिया में उजाला।
वर्ना यह सृष्टि अंँधेरी है।
6.51pm 5 June 2020
एक दूजे के बिन जिंदगी अधूरी है।
मैं दूंँ तुझको कार्बन डाइऑक्साइड,
तू दे मुझको ऑक्सीजन।
तभी हम और दुनिया पूरी हैं।
हम दोनों ही क्या .....
यह प्रकृति ही एक दूजे पर टिकी है।
जो सोचता है बिन तेरे मैं जी पाऊंँगा
उसकी तो मती अंँधेरे ने घेरी है।
आओ मिल जुल कर रहें हम।
जीएं और दूसरों को जीने दे हम।
प्रकृति और हम एक दूजे के पूरक हैं।
एक दूजे से ही है दुनिया में उजाला।
वर्ना यह सृष्टि अंँधेरी है।
6.51pm 5 June 2020
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