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Saturday, 21 March 2026

3428 कल हो न हो


 दुनिया के बीच मुसाफिर तू।

जाने कब तक यहांँ रहना हो।

कर ले तू कुछ अच्छे काम।

वही है पाना ,बोना जो।


हँस ले, गा ले, मौज मना ले।

क्या पता कल हो न हो।

लौट के तुझको मिलेगा वो ही।

जितना हिस्सा डाला हो।


कमा के ले ले जो है चाहता।

क्यों किसी से छीने तू।

आती जाती ये रहेगी दुनिया।

क्या पता कल हो न हो।


जब तक जिंदा, कर अच्छे कर्म ।

क्या पता कब लंबी नींद में सोना हो।

6.47pm 21 March 2026

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