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Sunday, 7 July 2019

970 मौसम की तरह ना बदलना (Mausam Ki Tareh Na Badlna)

मौसम देखे रंग बदलते
तुम्हें बदलता  ना देखूँ मैं।
तू मेरा साथ ही रहना,
चाहो मुझको जेसै चाहूं मैं।

तुम भी मेरे बन के रहना।
दूर कभी ना रहना तुम।
 प्रीत लगाई है जो हमने।
सुख-दुख संग रहना तुम।

संग हमेशा तेरा चाहूँ।
 दुख सुख में साथ निभाऊँ मैं।
दूर कभी ना तुमसे जाऊँ।
प्रीत अपनी अमर बनाऊँ मैं।
11.13pm 7 July 2019 Sunday

Mausam Dekhe Rang Badalte.
Tumhe Badalta Na Dekhun mein.
Tu Mere Sath hi rehna,
Chaho Mujhko, Jaise Chahun Main.

Tum Bhi Mere Banke rehna.
Dur Kabhi Na Rehna Tum.
Preet Lagai hai jo Humne.
Dukh Sukh Mein sang Rehna Tum.

Sang Hamesha Tera Chahoon.
Sukh Mein Saath Nibhaana mein.
Dur Kabhi Na Tumse Jaun
Preet apni Amar banaun mein.

Saturday, 6 July 2019

969 चमको सितारा बनकर (Chamko Sitara Bankar)

 बिखेरते रहो तुम यूँ ही,
 चमक सितारा बनकर।
रोशन रहे तुम्हारा,
सितारा आसमान पर।

 चमक यूँ ही बढ़ती रहे,
इस सितारे की।
रोशन हो दुनिया भी,
रोशनी इसकी पाकर।

और बड़े,और बड़े,
 बढ़ती रहे चमक इसकी।
रोशनी फिर ऐसी बड़े,
रश्क हो अपने आप पर।

चौंधे सबकी आँखें,
रोशनी तेरी देखकर।
और रोशन हो दुनिया तेरी ,
कामयाबी की रोशनी बिखेर कर।
9.31pm 6 July 2019

Bikherte Rahoo Tum Yun Hi.
Chamak Sitara Ban Kar.
Roshan Rahe Tumhara,
Sitara Aasman par.

Chamak Hamesha badhti Rahe,
Is Sitaare  kI
Roshan Ho Duniya bhi,
Chamak ishki Pakar.

Aur Bade, aur Bade,
 Badhti Rahe chamak Iski
Roshni Phir Aesi Bade,
 Rashk Ho Apne Aap Par.

Chondhen Sabki Aankhen
Roshni Teri Dekh  Kar.
Aur Roshan Ho Duniya Teri.
Kamyabi Ki Roshni Bikher kar.

Friday, 5 July 2019

968 फूल और कांटे (Phool Or Kaante)

मेरी राहों में काँटे बिछे हैं तो क्या।
मैं जिंदा हूँ,ये इस बात का सबूत है।
मुर्दों की राहों में देखे हैं कभी
किसी ने कांटे बिछाए हो

कांटो पर चलने के बाद ही ,
मखमली फूलों पर चलने का मजा है।
एहसास कोमलता का कहाँ होता है,
अगर शुरू से ही फूल बिछाए हो।

फिर यह भी तो है ,फूल मुरझा जाते हैं
और कांटे जिंदगी भर जिंदा रहते हैं
फिर वह चाहे रास्तों में बिछाए हो,
 या दिल में चुभाए हों।
6.00pm 5 July 2019


Meri Rahon Mein Kante Bichhhe Hain To Kya.
Main Zinda Hoon , Yeh is baat ka Saboot hain
Murdon Ki Rahon Mein Dekhe Hain,
 Kabhi  Kisi Ne Kaante bichaye Hon.

Katon pe chalne ke bad hi,
Makhmali Phoolon pe chalne Ka Maza hai .
Ehsaas komalta ka kahan hota hai,
Agar Shuru Se Hi Phool bichaye Hon.

Fir Ye Bhi Tu Hai ,Phool murjha Jaate Hein.
Kaante Zindagi Bhar Jinda Rehte Hain.
Fir wo Chahe raston par Bichaae Hon,
Ya Dil Mein chubhay Hon

Thursday, 4 July 2019

967 मंजिल ही तय नहीं (Manzil Hi Tai Nahin)

जब मंजिल ही तय नहीं है।
तो रास्ता कौन सा पकडूँ।
जो ले जाए मंजिल पर अपनी,
कैसे मैं उस सोच को जकडूँ।

जो मिल जाए सोच सही तो,
पंख लगा हवा में ऊडूँ।
गहराई जानने को मंजिल की,
फिर उस गहराई में उतरूँ।

चल कर फिर मैं अपनी राहें,
अपने ही अंतर से पूछूँ।
हो जाएगी मंजिल तय ना ?
विश्वास ले मैदान में उतरूँ।
10.35pm 4 July 2019

Jab Manzil hi Tai Nahin.
Tuo Rasta kaun sa pakdoon.
Jo Le Jaaye Manzil par apni,
Kaise Main uss Soch ko Jacdoon.

Jo mil jaaye Soch Sahi To,
Pankh Laga Hawa Mein udoon.
Gehraai Jan-ne ko Manzil ki,
Fir Uss Gehraai Mein Uttaroon.

Chal kar Fir Main Apni Rahen,
Apne Hi Antar Se Puchoon
Ho jayegi Manzil Tai Na?
Vishwas Le Maidan Mein Uttaroon.


Wednesday, 3 July 2019

966 जिंदगी का सफर (Zindgi Ka Safar)

भरोसा नहीं है पल भर का भी इस डगर में।
कब लग जाए पूर्ण विराम इस सफर में।
कभी फूलों भरी, कभी कांटों भरी है राहें।
कहना है मुश्किल, क्या मिलेगा इस सफर में।

चलते रहेंगे लोग इस डगर पर ,हर पल,
अपनों बेगानों का साथ लेते हुए ,पल पल।
जाने पहुंचेंगे भी मंजिल पर अपनी वो,
या बीच राह छूट जाएगा हाथ इस सफर में।
11.55 pm 3 July 2019
Bharosa Nahi Hai Pal Bhar Ka bhi is Dagar mein.
Kab Lag Jaaye Puran Viram Is Safar mein.
Kabhi Phoolon Bhari Kabhi Kanton Bhari Hai Rahen.
Kehna Hai Mushkil kya Milega is safar mein.

Chalte Rahenge log is Saffar Par Har Pal
Apno  Beganon Ka Sath lete Hue Pal Pal.
Jane pahuchenge bhi manzil par apni,
Yaa bich rah chhoot Jayega Hath Is  safar mein

Tuesday, 2 July 2019

965 ऐतबार (Aitbaar ,Etbaar )

ऐतबार की बात तू हमसे ना पूछ,21
हमें उनके हर लफ्ज़ पे ऐतबार है।21

वो चाहे प्यार  करें ना करें हमसे,
मान लेंगे , जो कहें हमसे प्यार है।

रहगुजर जो जाती है  उनकी मंजिल को।
साथ ले चलें हमें  ,उन्हें इखत्यार है।

चल पड़ेंगे हम उनके पीछे पीछे,
यह मानकर , आगे बहार ही बहार है।

डूब गए हम उनकी आंखों के दरिया में।
बचा लेंगे वो हमें ,ये ऐतबार है।
11.50 am 2 July 2019

Etbaar ki Baat Tu Na pooch.
Hamein unke Har Lafz pe aitbaar hai.

Vo chahe pyar karne Na Kare Humse.
Maan Lenge  ,jo Kahen Humse Pyar Hai.

 Rehguzar  jo jaati hai Unki Manzil ko.
Saath Le Chalen  Hamein ,Unhe Ikhtaiyar Hai.

Chal padenge Hum unke Piche.
Ye MaanKar Ki Aage Bahar hi bahar Hai.

Doob Gaye hum Unki Aankhon Ke dariya mein.
Bachcha Lenge Vo Hamein ,ye Aitbaar hai.

Monday, 1 July 2019

USQ964 रहगुज़र (Rehguzar, RahGuzar)

https://youtu.be/eqcwySddJfM
English version 3176
Punjabi version 2497

तेरी रहगुज़र से न जाने, गुज़र गए हम कब।
विरानगी का ना आया,ख्याल ,गुजरे जब।
तेरी रहगुज़र से.........।

ख्यालों में मेरे, तू आई ,ना गई जब।
राह गुजर न जाने ,गुज़र गया कब।
तेरी रहगुज़र से.........।

यूँ तो रहगुज़र थी लंबी बहुत ।
तुम्हारी चाह में ,फासला ,ना जाने तय हुआ कब।
तेरी रहगुज़र से.........।

पाने को दीदार ए यार ,चलते गए।
पता ही ना चला , खा़र ए राह बन गए गुल कब।
 तेरी रहगुज़र से.........।
2.51pm 1 July 2019 Monday
Teri Reh Guzar Se Na Jaane Gujar Gaye kab.
Veeranagi Ka na Aaya Khayal ,gujre Jab.
Teri Rah Guzar se.......

Khayalon Mein Mere Tu Aayi, Na Gayi Jab.
Rahguzar Na Jane guzar gaya kab.
Teri Rah Guzar.........

You tuo Rehujar Thi lambi bahut .
Tumhari Chah Mein fasla Na Jaane Tay Hua kab.
Teri RehGuzar se.......

Pane ko Deedar e Yaar Hum Chalte Gaye.
Pata hi na Chala Rah e Khar Gul Ban Gaye kab.
Teri Rah Guzar.....


https://youtu.be/eqcwySddJfM

रहगुज़र (Rah Guzar)
तेरी रहगुज़र से ना जाने, गुज़र गए
22  11111 2. 2 22.  111. 11
कब।=24
11
विरानगी का ना आया,ख्याल ,गुजरे
1212. 2.  2.      22.   121.    112
जब। 2 =24
तेरी रहगुज़र से.........।

ख्यालों में मेरे, तू आई ,ना गई जब।
122. 2.  22 2. 22.    2 12 11=24
रहगु़ज़र ना जानूँ  मैं,गुज़र गया, कहाँ कब।
1 1111.   2. 22. 2 111 12 1211=24
तेरी रहगुज़र से.........।

 रहगुज़र थी तेरे घर की ,लम्बी तो बहुत ।
11111. 2   22 11 2 112.2  111=24

चाह में ये,फासला ,न जाने, तय
21  2  2.  212.   1 22. 11 1211=24
हुआ कब।
तेरी रहगुज़र से.........।

पाने को दीदार ए यार ,हम,चलते गये।
22. 2. 221.   1 21.  11 112. 12=24
पता ही न चला , खा़र ए राह बन गए, गुल
12. 2 1  12.     21. 1. 21. 11. 11 22=24
कब।
 तेरी रहगुज़र से.........।