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Saturday, 7 September 2019

PozQ1032 वादियो तुम सँवर लो ज़रा (Waadiy Tum Sanvar lo Zara)

वादियो तुम सँवर लो ज़रा,
मिलने आ रहा हूँ मैं वहाँ।
तुम में भी उत्साह हो भरा,
जैसे मैं उत्साहित हूँ यहाँँ।

तुम्हें देख खिले मेरा मन।
खिल जाऊँ मैं भी ज़रा।
तुमसे मिलते ही ऐ वादियो,
हो जाऊँ मैं भी हरा।

खो जाएं फिर ऐसे
इक दूजे में हम तुम।
रहे ना दुनिया की खबर,
ना रहे अपना भी पता
11.32pm 7 Sept 2019

Waadiyon Tum Sanvar lo Zara.
Milne Aa raha hun main vahan.
Tum mein bhi utsah ho Bhara,
Jaise main utsahit Hun Yahan.

Tumhe Dekh Khile Mera Mann.
Khil jaun main bhi Zara.
Tumse Milte Hi Wadio
Ho jaaun Main Bhi Hara.

Kho Jaen Fir Aise,
Ek Duje Mein Ham Tum.
Rahe Na duniya ki khabar,
 Na Rahe Apna Bhi pata.

Friday, 6 September 2019

1031 मोहब्बत नहीं संभाली (Mohabbat Nahin Sambhali)

मोहब्बत की थी बड़ी शिद्दत से
पर मैं उसे संभाल ना पाया हूँ।
अब चाहता भी नहीं वापस पाना,
 जो मैं पीछे छोड़ आया हूँ।

तुझे छोड़ने के बाद ही,
जिंदगी के नए रास्ते निकले हैं।
अब ना कोई गम है मुझे।
उसका ,जो पीछे छोड़ आया हूँ।

तेरी मोहब्बत छोड़ जब,
नए रिश्ते बने  मेरे।
तभी समझा ,किनका अपना,
किनका मैं पराया हूँ।

अच्छा हुआ ना संभाला,
उनको, जो अपना ना था।
क्या है अपना मेरा,
मैं तभी समझ पाया हूँ।
4.50pm 6 Sept 2019

Mohabbat ki thi Badi shiddat se.
 Per main use sambhal na Paya hun.
Ab Chahta  bhi nahin Wapas pana,
Jo Main Piche Chhod aaya hun.

Tujhe chhodane ke bad hi,
Jindagi ke naye Raste nikale Hain.
 Ab Na Koi Gam Hai Mujhe, uska,
Jo Piche Chhod aaya hun.

Teri Mohabbat Chhod Jab,
Naye Rishte Bane Mere.
Tabhi Samjha ,kin ka Apna,
Kinka Mein ,Paraya Hoon.

Achcha hua na Sambhala,
Unko ,Jo Apna Na Tha.
 Kya Hai Apna Mera,
Main to Tabhi Jaan Paya hun.

Thursday, 5 September 2019

PozQ1030 साहिल (Sahil)

बहती लहरों का, बस एक साहिल ही सहारा है।
जहाँ बहती लहरों को, किसी ने एक पल निहारा है।

जिंदगी चलती है लहरों सी, रुकने का नाम नहीं लेती।
थक जाने पर भी ,मिलता कहाँ  किनारा है।

धूप ,छाँव और मेहनत भरी जिंदगी की इस जंग में।
कहाँ साहिल मिला, जहाँ चैन का एक पल भी गुजारा है।

दे कुछ पल ऐ जिंदगी.... ,ठहराव के, आराम के मुझे।
मैं भी यह जान पाऊँ ,की जिंदगी का क्या इशारा है।

यूँ मिले अब चैन जिंदगी को, कि कुछ भी ना ख्वाहिश बाकी रहे।
यही कहूँ अब उस खुदा से ,मेरा कुछ नहीं, जो है सब तुम्हारा है।
8.13pm 5 Sept 2018



Behti lehron ka bas Sahil Hi Sahara hai.
Jahan Behti leharon Ko Kisi Ne Ek Pal Nihara hai.

Jindagi Chalti Hai leharon si,  rukne ka naam Nahin Leti.
Thak Jaane per bhi ,Milta kahan Kinara Hai.

Dhup chanv,aur mehnat Bhari Zindagi Ki is Jung mein.
Kahan Sahil Mila ,Jahan chain ka Ek Pal Bhi Guzara hai.

De Kuchh Pal Jindagi ..Therav ke ,Aaram Ke Mujhe.
Main bhi Ye  jaan Paun, ki Jindagi Ka Kya Ishara hai.

Yun Mile ab chain Jindagi ko, Ki Kuchh Bhi Na Khwahish Baki Rahe.
Yahi Soch Ho Ab Zindgi Me, Mera Kuchh Nahin Jo Hai Sab Tumhara Hai.

Wednesday, 4 September 2019

1029 आँखों का दिल से रिश्ता (Aankhon Ka Dil Se Rishta)

आंखों का  दिल से रिश्ता, बहुत गहरा होता है।
खता आँखें करती है, सहना दिल को पड़ता है।

ले लेती हैं यह आँखें मिलते ही, दिल किसी का।
फिर चैन अपना खोना, इस दिल को पड़ता है।

आँखें तो आंसुओं से  गुबार निकाल लेती हैं।
 दिल ही दिल में मगर,  तड़पना दिल को पड़ता है।

आँखें ख्वाब सजाती हैं ,और सकून पाती हैं।
ख्वाबों में भी
नजर मिलते ही ,धड़कना इस  दिल को पड़ता है।

जान लो फिर भी, यह तो इस दुनिया का नियम है।
खता करे कोई , सहना किसी और को पड़ता है।
(in meter)

आँखों का  दिल से रिश्ता, बहुत गहरा है।
खता आँखें करती है, सहना दिल को पड़ता है।

ले लेती हैं यह नजरें मिलते ही दिल किसी का।
फिर चैन अपना खोना, इस दिल को पड़ता है।

आँखें तो आंसुओं से  गुबार निकाल लेती हैं।
 दिल ही दिल में,  तड़पना दिल को पड़ता है।

आँखें तो ख्वाब सजाती है महबूब के,और सकून पाती हैं।
ख्वाबों में भी, नजर मिलते ही, धड़कना  दिल को पड़ता है।

यह तो इस दुनिया का नियम ही है।
खता करे कोई , सहना किसी और को पड़ता है।
4.51pm 3 Sept 2019
Aankhon Ka Dil Se Rishta, bahut Gehra Hai.
 Khata Aankhen Karti Hain,  Sehna Dil Ko padta hai.
Le Leti Hai yeh Nazren Milte Hi, Dil Kisi Ka.
Fir chain Apna khona , Is Dil Ko padta hai.

Aankhen To Aansuon se Gubaar nikal Leti Hain.
Dil Hi Dil Mein, tadapna Is  Dil Ko padta hai.

Aankhen To khwab Sjaati Hain,Mahbub ke, aur sakun paaty hain.
Khwabon Mein Bhi Nazar Milte Hi, tadapna Dil Ko padta hai.

Yah to Is Duniya Ka Dastur Puraana hai
Khata Kare Koi ,Sehna Kisi Aur Ko padta hai.




Tuesday, 3 September 2019

1028 कलम (Kalam)

जब मिल ही गयी है कलम तो, गम को खुशी में बदल दो।
कर दो मशहूर इस दुनिया में , अपनी कलम को।

लिखो कुछ ऐसा , कि दुनिया का ढंग बदल जाए।
पतझड़ का मौसम जो छाया है , बहार आ जाए।

लोगों के अंधेरे कोनों में फिर उजाला कर दो।
बेरंग जिंदगी में प्यार के लफ्जों के रंग भर दो।

लिख कुछ ऐसा की बुझे दिल के दिए जल जाएं।
खुशबू आ जाए उन गुलों से ,जो हैं मुरझाए।

तेरा नाम आते ही सुकून का एहसास हो।
बुझ जाए तेरे लफ़्ज़ों से, दिल की जो प्यास हो।
4.38pm 3 September 2019

Jab Mil Hi Gayi Hai Kalam to, Gam ko Khushi Mein Badal do.
Kar do mashhur Is Duniya Mein , Apni Is Kalam ko.

Likhe Kuchh Aisa ki Duniya ka dhang Badal Jaaye.
Patjhad Ka Mausam Jo Chhaya Hai, Bahar Aa Jaaye.

Logon ke andhere Kone Mein, Fir Ujala kar do.
Berang Zindagi Mein, Pyar Ke Lafzon Ke Rang Bhar Do.

Likh Kuchh Aisa ki Bujhe Dil me Diye Jal  jaayen
Khushbu Aa Jaaye gulon se, jo hai Murzhaaye.

Tera Naam aate hi ,sukun ka Ehsas Ho
Bujh Jaaye Tere Lafzon Se Dil Ki ko Pyas ho. 

Monday, 2 September 2019

1027 औरत (Aurat)

औरतों की कठिनाइयों का अंदाजा लगाओ ज़रा।
उठा रही है बोझ वो,जैसे उठा रही है धरा।

सब कुछ सहती है पर  मुस्कुराहट दूर नहीं जाती।
सब काम पूरे करती है हँसती और गाती।

यह भी धरा है जो अपने में समेटे है सारे गम।
इसी की मेहनतों का नतीजा हैं तुम और हम।

कर मान इसका अगर तू जिंदगी चाहता है सफल।
तेरे पूरे होंगे हर काम ,जो रखेगा याद इसे हर पल।
6.40pm 3 Sept 2019

Auraton ki Kthnayion ka andaza lagao Jara.
Utha rahi hai Bozh Vo Jaise Utha rahi hai Dhara.

Sab kuch Sehti hai per ,Muskurahat dur Nahin jaati.
Sab kam pure karti hai , hansti aur Gaati.

Yeh bhi Dhara hai, jo Apne mein Samete hai Sare Gham.
Isi Ki mehnaton ka Nateeja Hain Tum Aur Hum.

Kar Maan iska ,Agar tu Jindagi Chahta Hai Safal.
Tere pure Honge Har Kaam, Jo rakhega Yad Ise har Pal. 

Sunday, 1 September 2019

1026 सुरों की महफ़िल(Suron Ki Mehfi)

सुरों की महफ़िल सजी है आज।
हुआ  सुरीले गीतों का आगाज़।
सुरमई हो गई गीतों से महफिल।
ऐसा था ,गाने वालों का अंदाज़।

मधुर सुरों के तरन्नुम थे।
सुनने वाले सब गुम थे।
बैठे थे सब ध्यान लगाए।
ऐसा था महफिल का अंदाज़।

खोए बैठे थे सुरों में।
मतवाली प्यार की धुनों में।
 कुछ और दिल को ख्याल ना था।
यूँ महफिल चढ़ रही थी परवाज।

कितनी मधुर है सुरों की भाषा।
दे जाती हर दिल को दिलासा।
खो देती सबको ,इन मधुर धुनों में।
सबके दिल कर जाती बाग बाग।
8.20pm 1 September 2019

Suron Ki Mehfil Saji hai aaj.
Hua Sureeley geeton ka aaghaz.
Surmai Ho gai Geeton se mahfil.
Kaisa tha gane Walon ka Andaaz.

Madhur suron ke Taranumm the.
Sunne wale Sab ghum the.
Baithe Sab Dhyan Lagaye.
Aisa tha mahfil ka Andaaz.

Khoe Baithi The Sab Suron mein.
Matwali Pyar Ki Dhuno Mein.
Kuchh Aur Dil Ko Khyal Na Tha.
 Yun Mehfil Chdh rahi thi parvaaz.


Kitni Madhur Hai Suron ki bhasha.
De Jaati Hai Har Dil Ko Dilasa.
Kho Deti sabka In Madhur dhunon mein.
Sab Ke Dil Kar Jati Bagh Bagh.