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क़ाफ़िया ई
रदीफ़ क्या है
बोल, बिन प्यार आदमी क्या है।
बिन तेरे मेरी जिंदगी क्या है।
क्यों नहीं देता प्यार तू मुझको।
ये बता मुझ में तू कमी क्या है।
रास आए मुझे अंँधेरे ही।
भूल बैठा हूंँ रोशनी क्या है।
है अगर प्यार तुझको भी मुझसे।
ये बता दे कि बेबसी क्या है।
प्यार मेरा कबूल जो कर लो।
जान लूँ मैं भी फिर खुशी क्या है।
प्यार करके तू जान जाएगा।
दर्द देती यह बेरुखी क्या है।
प्यार करके बताना फर्क मुझे।
प्यार क्या और खु़दकुशी क्या है।
प्यार कर जाना तीरगी क्या है।
'गीत' आंँखों में और नमी क्या है।
9.41pm 15 Dec 2025
तीरगी- अँधेरा
*साहिबे-मिसरा*-- *जनाब नफ़ीस अहमद पाशा साहब मुरादाबादी*

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