Followers

Monday, 29 December 2025

3337 ग़ज़ल मतलबी यार


English version 3338

Punjabi version 3339

 122 122 122 122

क़ाफ़िया ए

रदीफ़ मतलबी यार


जहाँ पे भी देखा मिले मतलबी यार। 

यहांँ जिसको चाहा बने मतलबी यार।

बनाये किसी को कोई कैसे अपना। 

ज़रा दिल में झांँको, दिखे मतलबी यार।

दुखेगा ये दिल चाहे समझओ कितना।

तुम्हारे हो जब सामने मतलबी यार।

फँसे उलझनों में दिखे हल न कोई।

करें क्या कोई जब हँसे मतलबी यार।

दिखाये तुम्हें प्यार, बन के वो अपना।

करें क्या, जो धोखा करे मतलबी यार।

बड़ी मुश्किलें पार करनी पड़ेंगी।

जो बन साथ अपने चले मतलबी यार।

पता जब चले यार है मतलबी तो।

हो विश्वास कैसे, कहे मतलबी यार।

पता जब लगा 'गीत' सब जानती है। 

लगे 'गीत' को मानने मतलबी यार।

9.32am 29 Dec 2025

No comments: