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क़ाफ़िया ए
रदीफ़ मतलबी यार
जहाँ पे भी देखा मिले मतलबी यार।
यहांँ जिसको चाहा बने मतलबी यार।
बनाये किसी को कोई कैसे अपना।
ज़रा दिल में झांँको, दिखे मतलबी यार।
दुखेगा ये दिल चाहे समझओ कितना।
तुम्हारे हो जब सामने मतलबी यार।
फँसे उलझनों में दिखे हल न कोई।
करें क्या कोई जब हँसे मतलबी यार।
दिखाये तुम्हें प्यार, बन के वो अपना।
करें क्या, जो धोखा करे मतलबी यार।
बड़ी मुश्किलें पार करनी पड़ेंगी।
जो बन साथ अपने चले मतलबी यार।
पता जब चले यार है मतलबी तो।
हो विश्वास कैसे, कहे मतलबी यार।
पता जब लगा 'गीत' सब जानती है।
लगे 'गीत' को मानने मतलबी यार।
9.32am 29 Dec 2025

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