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Tuesday, 14 April 2026

3451 गाना मन मेरा कभी कुछ, कभी कुछ बोले

Famous poet Sh. Ganesh Gani from Kullu 

Punjabi version 2396

English version 3450
 मन मेरा कभी कुछ, कभी कुछ बोले।

बोले जब दिल के ये सारे भेद खोले।


आए कैसे मुझे तेरी बात का यकीन,

सच बात जिस कभी की ही नहीं।

कोई नहीं जो तेरे सच-झूठ तोले।

मन........कुछ बोले, बोले जब......भेद खोले।


छत पे मैं बैठी बैठी राह देखूं ,

थक गई, आएगा तू कब सोचूंँ। ।

आना जल्दी पर आना हौले हौले,

मन........कुछ बोले, बोले जब......भेद खोले।


अपने आपसे बातें में करूँ,

सुन न ले कोई, इस बात से डरूँ।

तेरे बिना किससे कोई दिल फोले।

मन........कुछ बोले, बोले जब......भेद खोले।


वो भी दिन थे जब हँसी ही हँसी थी,

चारों तरफ बस खुशियों बसी थी।

जो खो गए सुख मेरे कोई टोले।,

मन........कुछ बोले, बोले जब......भेद खोले।


देखो मन मेरा क्या-क्या रंग दिखाये,

बैठ किनारे कई 'गीत' गुनगुनाये।

देखूँ मन मेरा मैं बैठ ओहले।

मन........कुछ बोले, बोले जब......भेद खोले।

7.28pm 14 April 2026

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