क़ाफ़िया ओ
रदीफ़ लेता
तू कुछ पल को मेरा बन के खड़ा जो पास हो लेता।
तो सर कंधे पे रख के मैं, तेरे जी भर के रो लेता।
की होती काश तूने इक दफा कोशिश सुलह की जो।
न बनती बात, तो चाहे तू दरवाजे को ढो लेता।
किया है प्यार तुझसे हार कर सब कुछ ही मैने तो।
ज़रा होती जो हिम्मत तुझसे अपना हिस्सा खो लेता।
पकी फसलें जो काटी तुमने मेरे प्यार की ऐसे।
पता लगता मोहब्बत का जो दिल में बीज बो लेता।
बिना सोचे बिना समझे है वारी जान तुझ पे ये,
तेरा दिल काश मैं पहले ज़रा एक बार टो(टटोल) लेता।
तुझे भी चोट लगती जो तेरे दिल पर कभी दिलबर।
तो दामन तू भी अपना आंँसुओं से भर भिगो लेता।
अगर दिल टूटता तेरा किसी के प्यार में इक दिन,
तू मेरे साथ मेरे दुख का साथी यार हो लेता।
जो रहती 'गीत' मेरे साथ पल भर हमसफर बनकर।
तो यादें साथ अपने में खजाने सी संजो लेता।
7.45pm 2 Jan 2025

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