With Satnam Sandhu ji
Punjabi version 2266
English version 3372
जितना है तू खींचे जाए, उतनी ज़िंदगी खिंचती जाए।
इतना तू क्या खर्च भी लेगा, जितना तू है कमाता जाए।
दुनिया की है अजब ही माया, कैसे-कैसे खेल दिखाए।
अमीर गरीब का पलड़ा यहाँ पर, ऊपर नीचे झूलता जाए।
कौन अपना है, कौन पराया, किसी को भी समझ न आए।
मिलता तुझको तेरा हिस्सा, जैसा तू कर्म कमाए।
तू क्या बैठा, देखे जाता, क्या कुछ तुझको समझ न आए।
खेल खिलाड़ी, जीतें - हारें, तू बस बैठा देखता जाए।
6.31pm 23 Jan 2026

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