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Thursday, 15 January 2026

3354 भुला न पाया

Punjabi version 2270
English version 3355

क्यों दुनिया है इतनी पेचीदा। 
लोगों में है घुसती रहती। 
अपने काम से काम न रखे। 
औरों को है देखती रहती।

यादों ने तेरी मार मिटाया। 
तुझको फिर भी तरस न आया। 
घुटते-घुटते हो गया आधा। 
तुझको फिर भी भुला न पाया।

डाल नज़रें मुझ पर प्यार की। 
तुझे कसम है अपने यार की। 
दुनिया की नज़रों से बचकर। 
दोनों बढ़ाएँ पींगें प्यार की।

लोगों की नज़रों से बचकर। 
आ जा दोनों एक हो जाएँ। 
फिर, लोक-लाज दुनिया की तजकर। 
प्यार हमें है, यह सबको बताएँ।

7.16pm 15 Jan 2026

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