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हर वक़्त यही क्यों रखता सोच।
मैं कुछ करूँगा तो क्या कहेंगे लोग।
कर ले तू जो तेरा दिल करता है।
लोगों के खातिर क्यों खुद को लेता रोक।
दुनिया में देखे लोग तरह-तरह के।
कानों से बहरे और आँखों से अंधे।
अगर ज़्यादा इनमें उलझ गया।
पता नहीं चलेगा कब देंगे नोच।
दुख़ दूसरे का कोई न समझे।
जब खुद को लगती, आँसू हैं बहते ।
दूसरे की बड़ी चोट भी छोटी लगती है।
अपनी बड़ी लगती है, छोटी-सी खरोंच।
कर ले पूरे अपने सपने।
रोज़-रोज़ ये दिन नहीं मिलने।
लोग यूँ ही जलते रहते।
तू कर ले, जो है तेरी सोच।
4.52pm 7 Jan 2026

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