2212 2212 2212 2212
क़ाफ़िया़ आ
रदीफ़ मिला
यूं ही नहीं मिलता कोई जैसे तू मुझको आ मिला।
होंगे किए अच्छे कर्म जो, साथ तेरा था मिला।
नाकामियाँ चाहे मिली कितनी मुझे इस राह में।
कर पार मुश्किल अंत में, ईनाम मंजिल का मिला।
हमने कभी भी हौसला अपना न गिरने था दिया।
गिरते रहे उठते रहे, ये फल तभी उसका मिला।
मैं जानता हूंँ मुश्किलें कितनी थी तेरी राह में।
पर बात इसमें है खुशी की, वो जो था बोया मिला।
आया था मेरे सामने वह दुश्मनों के वेश में।
किसको पता था दोस्ती का मुझको था तोहफा मिला।
मैं सोचता बस जा रहा था क्या हुआ कैसे हुआ।
है कौन लगता तू मेरा जो इस घड़ी में आ मिला।
होगा कोई तो राब्ता पिछले जन्म का तुझसे जो।
मेरी गली का रास्ता तेरी गली से जा मिला ।
जो साथ तू फिर सोच हो किस बात की अब 'गीत' को।
जब दोस्त उसको इस जमाने में यहाँ ऐसा मिला।
2212 2212 2212 2212
11.13am 13 Jan 2026

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