बता कब मैंने तुझे भुलाया।
बता कब मैं तुझे याद आया।
मैं ही तुझे याद करता रहा।
या तूने भी मुझे नहीं बिसराया।
आ चाँद को देख करें कुछ बातें ।
दुख-सुख अपने आपस में बाँटें।
दूर हुए चाहे किस्मत के मारे ।
पर इसे ही अपनी किस्मत न मानें।
इसमें हमारा कोई कसूर नहीं था।
वही हुआ जो किस्मत में लिखा था।
किस्मत के लिखे को स्वीकार कर।
हों राज़ी उसकी रज़ा को मानकर।
अगर किस्मत हुई तो फिर मिलेंगे।
दुख-सुख अपने फिर से बाँटेंगे।
ज़िंदगी में जो लिखा था, हुआ।
उसका कभी गिला न करेंगे।
5.23pm 10 Jan 2016

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