Punjabi version 2273
English version 3348
पास रह कर भी कोई पास नहीं।
और दूर रह कर भी कोई दूर नहीं।
कैसे पता करें किसी के दिल का।
कैसे पता चले कि कोई मजबूर नहीं।
पता नहीं चलता किसी की सोच का।
कि डालेगा आँखों में कोई धूल नहीं ।
ज़माना चलता जा रहा है आगे ही आगे।
लगता आज किसी को किसी की लोड़ नहीं।
ज़माना बदल गया है बहुत ज़्यादा।
मैं ज़रा भी करता मखोल नहीं।
माता-पिता आजकल रख कर कोई, राज़ी नहीं।
बच्चे कहते हैं उनकी हमें लोड़ नहीं।
पता नहीं दुनिया का क्या बनेगा।
रुकती हुई लगती यह दौड़ नहीं।
5.15pm 8 Jan 2026

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