क्या कहूँ कैसे कहूँ, मौसम दिखाए रंग।
पहाड़ तो चलें ही चलें,बादल भी चलते संग।
धूप निकल आती फिर कुछ दूरी पर ऐसे।
कर देती उड़ते बादलों को भंग।
है न कुछ अजीब ही प्रकृति देखो।
कुछ समझ में नहीं आते इसके ढंग।
आओ लें जीवन का मज़ा।
होलें इसके ही अंग संग।
3.42pm.5 Oct 2026

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