पहाड़ ऊँचे इतने कि छू रहै आसमान।
सड़कों का घुमाव धनुष के जैसा।
उस पे चीड़ के पेड़ जैसे चढ़ी हो कमान।
कभी चढ़ते चढ़ाई, कभी नीचे आ जाते।
आते जाते वाहन मुश्किल से निकल पाते।
पर करता नहीं कोई किसी को परेशान।
रंग बिरंगे फूल खिले हैं कहीं।
हज़ारों पराजातियाँ वृक्षों की कहीं।
देखकर प्रकृति को हूँ मैं हैरान।
2.08pm 3 Oct 2026

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