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Friday, 2 October 2026

3613 झरने बहते झर झर

 


झरने झर झर बहते जाएं।

चाहे कितना शोर मचाएं।

फिर भी कितने मन को बाएं।


पहाड़ो से ये निकलें कल कल।

शोर मचाए ज़ोर से हर पल।

गीला करे धरती को जल।


चाहे पाएं आंँखें अजब सकून।

फिर भी रहता मन में जुनून।

दिल ये कहे बस यहीं रुकूं।

5.11pm 2 Oct 2026

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