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Sunday, 7 March 2021

1578 नारी ( अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस)

 धरती है हर नारी रूप धरा का

पोषण करती प्रेम प्यार से शिशु का।

कोमलांगी है पर कमजोर नहीं।

वक्त आने पर बन जाती है चामुंडा।

सब सह कर एक वही रख पाती,

प्रेम प्यार से घर को महकाती ।

किसी को कोई कष्ट न देती।

सदा हँसती और गाती रहती।

नारी एक ऐसा ध्वज है।

जो रहती सदा सजग है।

 उसके अस्त्र हैं प्रेम प्यार ।

 करना तुम उसका सत्कार।

8.08pm 7 March 2021

Saturday, 6 March 2021

1577 बंदर (बाल कविता)

 बंदर तो है बंदर, 

माना है वो मस्त कलंदर ।

जब देखो डाल पर जा बैठे ,

पाया जाए चिड़ियाघर के अंदर।


बंदर की है बात अनोखी ।

जाने ले जाए किस की टोपी।

हाथ से ले किसका जाए बटुआ।

जा बैठे किस के घ़र के अंदर।


बच्चा नकल करे जो कोई ।

बन जाए वह नकलची बंदर ।

बच्चा हरकत करे जो कोई

कहलाए वो मस्त कलंदर।


कोई बच्चा जब करे शरारत। 

कहते सब हैं उसको बंदर। 

कहना क्या ,अब है भाई, 

सबके भीतर है इक बच्चा,  और इक बंदर। 

6.40pm 6.March 2021

Friday, 5 March 2021

1576 जल उठी जब लौ मेरे मन की

 जल उठी जब लौ मेरे मन की ।

हर तरफ उजाला हो गया ।

नए फिर तराने यह गाने लगा।

 जो कभी मेरा मन था सो गया ।


जब उजाला फैल गया ।

हर तरफ से रंग बरसने लगा ।

बेरंग थी जो महफ़िलें सब,

 माहौल उनका रंगीन हो गया।


 यह तो मन की ही बात है बस ।

तो क्यों ना मन खिला-खिला रखें ।

दूर करके सब अंधेरे मन के,

तू खिला मन, जैसे मेरा हो गया।

4.25pm 5 March 2021

Thursday, 4 March 2021

1575 Gazal गज़ल :मैं ही बस इक फजूल हूँ शायद

2122 12 12 22 

काफि़या :ऊल, Qafia Ool

रदीफ़ : हूँ शायद, Radeef Hun Shayad

सोचा, गजरे का फूल हूँ शायद ।

तेरे कदमों की धूल हूँ शायद।


हर कोई है तेरे लिए अपना ।

मैं ही बस इक फिजूल हूँ शायद ।


सबकी बातें कुबूल है लेकिन।  

मैं नहीं बस कुबूल हूँ शायद।


 यूँ ना ठुकरा मुझे मेरे हमदम ।

मैं ही तेरा रसूल हूँ शायद ।

(messenger of god) 

मुड़ के इक बार देख तो मुझको।

 मैं ही तेरा हुसूल हूंँ शायद।

(achievement) 

 जो बनाए  नियम हैं, तोड़े वो। 

मैं ही बस, इक उसूल हूँ शायद।

4.32pm 4 March 2021

Wednesday, 3 March 2021

1574 Gazal गज़ल: बेवफाई आज की ही बात है क्या

 2122 2122 2122

काफि़या  इला  Qafia Ila

रदीफ़ है Radeef Hai

क्या मुझे तुझ से,वफा करके मिला है ।

हाँ मगर फिर भी न कोई भी गिला है ।

बेवफाई आज की ही बात है क्या ।

ये तो सदियों का पुराना सिलसिला है ।

मिल गया गर प्यार करने वाला कोई ।

फूल दीवानों के दिल का फिर खिला है।

 हो रहे जुल्मों सितम,फैली है नफरत ।

क्या यूँ ही चलता ये रहना काफिला है।

9.55am 01 March 2021

Tuesday, 2 March 2021

1573 टूटा हुआ टुकड़ा

 नजारो, बहारो,सितारो ,आ जाओ पास मेरे।

मैं तुम ही में से कोई टूटा हुआ टुकड़ा हूँ। 

मुस्कुराने की वजह ढूँढता रहता मैं हर पल।

मैं तुम्हीं सा ही कोई बिखरा हुआ सितारा हूँ। 

आओ गले लगा लो मुझको, भर लो आंचल में।

जाने न देना मुझको ,अपनी पनाहों से दूर ।

भर लेना आँचल में, कभी जुदा न हो पाऊं मैं ।

मैं तुम्हारा ही कोई बिखरा हुआ टुकड़ा हूँ। 

2.45pm .1 March 2021

Monday, 1 March 2021

1572 जाने क्या हो जाता है

 बहारों में जब भी मेरे दिल ने खेलना चाहा ।

तभी कुछ ऐसा हुआ कि यह मुरझा गया ।

हौसला कर उनको हाल-ए-दिल जो बताना चाहा ।

तभी कुछ ऐसा हुआ कि यह चुप हो गया ।

मंजिलों की तरफ मैं बड़ा जा रहा था ।

तभी कुछ ऐसा हुआ कि सफर खो गया ।

धड़कते दिल से याद उनको करना जो चाहा ।

न जाने कहाँ कब नींद आई और मैं सो गया ।

सब कुछ होते होते यह जाने क्या हो जाता है ।

जो सोचना है पड़ता ,यह कब,कहाँ,क्या हो गया।

11.20am 01 March 2021