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Friday, 7 May 2021

1639 आँखों ने हँसना सीख लिया है

जबसे होठों की हँसी छुप गई है ।

आँखों ने हँसना सीख लिया है ।


कुछ भी थमता नहीं इस जग में ।

हर हाल में हमने जीना सीख लिया है ।


गम न कर समय समय की बात है ।

आज सबने घूँट सब्र का पीना सीख लिया है।


अच्छे दिन भी आएंगे इस आस में ,

बुरे दिनों को हँसकर जीना सीख लिया है ।


चेहरे से पहचानते थे हम सबको पहले ।

आँखों से पहचानना सीख लिया है ।


पहले पास रहकर भी थी दूरियाँ सब में ।

अब दूर रहकर भी पास होना सीख लिया है।


अब सब खड़े हैं एक दूसरे की मदद को ।

सबने अब सुख दुख बाँटना सीख लिया है ।


पहले कौन अपना कौन पराया करते थे ।

अब सबको अपना मानना सीख लिया है।

12.17pm  07 May 2021

Thursday, 6 May 2021

1638 एक थी चिड़िया

 एक थी चिड़िया, रोज ही आती ।

तिनका तिनका घोंसला बनाती ।।

कर रही थी वह एक घोंसला तैयार ।

आने वाला था उसके घर नया मेहमान।।

मैं भी उसको रोज थी देखती ।

सुंदर लगती जब चीं चीं करती ।।

कुछ दिन से जब आवाज न आई।

बाहर उसको मैं देखने आई ।।

बाहर वृक्ष पर घोंसला न था।

देखकर डर गया मेरा  मन था।।

कहाँ गया वो आधा बना घोंसला ।

कहीं उसका नामोंनिशान न था।।

इधर-उधर में देखने लगी ।

पर पाया न उसका,एक भी तिनका ।।

पूछा सफाई वाले से हार कर ।

कहीं घोंसला देखा है.. गिरा उधर।।

झट से बोला ,गिर गया था वहीं पर।

मगर साफ कर दिया.. उठाकर ।।

मन मेरा घबराने लगा सोचकर ।

क्या बीती होगी प्यारी चिड़िया पर।।

किसने मेरा घर बर्बाद कर दिया।

अगर खुद से गिरा तो कहाँ गया।।

तिनका तो वहीं पड़ा होता ।

कोई तो निशान बचा होता।।

फिर बना लेती इक इक जोड़कर ।

क्या मिला इंसान को मेरा घर तोड़कर।।

क्यों नहीं सोचता इंसान ऐसे,

अगर, कोई तुम्हारा घर बर्बाद कर दे ऐसे।।

 तुम बाहर से काम कर के आओ ।

लौटकर, घर का निशान भी न पाओ।

 कुछ तो सोचो वह भी जीवित प्राणी हैं।

यह दुनिया तो आनी जानी है ।।

अच्छा नहीं आह लेना किसी की।

मिलती है सब को सजा ,करनी की।।

बहुत याद आती है मुझको उसकी।

जान नहीं पा रही हूँ मैं,उसके मन की।

1.02pm 5 May 2021

Wednesday, 5 May 2021

1637. साठवीं सालगिरह मुबारक हो

सालगिरह मुबारक तुमको माँ बाबा।

यूं ही खुशी खुशी तुम ,

एक दूसरे का साथ देते रहो ।


चलते रहो जिंदगी के पथ पर ,

हाथों में हाथ डाल

यूं ही तुम मुस्कुराते रहो ।


तमन्ना है यूं ही गुजरते जाएं ,

सालों साल और आप,

 एक दूसरे के संग मुस्कुराते रहो।

6.55pm 05 May 2021

Tuesday, 4 May 2021

Q1636 Ghazal : गज़ल :अगर तुम जो मुझसे यूँ नफरत न करते

122 122 122 122

Qafia : att,काफिया : अत

Radeef: na karte, रदीफ : न करते


अगर तुम जो मुझसे यूँ नफरत न करते।

तो तुमसे भी हम फिर  शिकायत न करते।


निभानी थी दिल से ,मेरे दुश्मनी जो।

कभी हम तुम्हारी रियायत न करते ।


तेरा साथ देके यूँ पछताना होगा ।

तेरी हम कभी फिर हिमायत न करते ।


जो हम जान जाते तेरी बेवफाई ।

तो हम भी यूँ तुमसे मुहब्बत न करते ।


जो था टूटना तय, मेरे दिल का यारो।

तो हम "गीत" इसकी हिफाजत न करते ।


3.36pm 3 May 2021

Monday, 3 May 2021

1635 Ghazal:गज़ल: मिलके क्यों यार हैं बदल जाते

Punjabi version 2432

English version 3424

2122 1212 22

Qafia : Aar, काफि़या :आर

Radeef : Hain badal jate,रदीफ़ : हैं बदल जाते


क्यों ये आसार हैं बदल जाते ।

मिलके क्यों यार हैं बदल जाते ।


आज कुछ और लगते हैं वो तो।

कल ये किरदार हैं बदल जाते ।


जब ये सरकार है बदलती तो ।

त्यों ही दरबार है बदल जाते ।


जिसकी लाठी है भैंस भी उसकी।

कल ये(रोज़) हकदार हैं बदल जाते ।


कितनी छोटी खबर की मुद्दत है ।

रोज अखबार हैं बदल जाते ।


कल जो नाजो़ से हमको रखते थे ।

आज बरदार (नाज़ उठाने वाले)हैं बदल जाते।


जिनको पाला था हमने नाजो़ से ।

क्यों वो परदार(जिसे पंख हों)  हैं बदल जाते।


जिनको सींचा लहू से हमने था।

बन समरदार (fruit bearing) हैं बदल जाते ।


"गीत" कुछ हैसियत न थी जिनकी।

बन असरदार हैं बदल जाते।

11.58am 3 May 2021

Sunday, 2 May 2021

1634 शाँत रह के समां गुजा़र

 निकल जाएंगे मुसीबतों के पहाड़ से ।

शाँत रह के समां गुजा़र ,

क्या मिलेगा दहाड़ के।


मुश्किलें सिखा रही है तुझे हौसला रखना ।

यही सिखाएंगी तुझे ,

जीत का स्वाद भी चखना।


उठ खड़ा हो कर्म अपना तू करता जा।

मुश्किलों को पार कर,

मंजिलों की ओर बढ़ता जा।


एक दिन मिल जाएंगी सब मंजिलें तुझे ।

तू कर्म कर बस ,

नतीजे सामने मिल जाएंगे तुझे।

4.43pm 2 May 2021

Saturday, 1 May 2021

1633 Ghazal : गज़ल : आज किसने दिया जलाया है

 2122  1212 22

Qafia :Aaya काफिया आया

Radeef : Hai रदीफ़: है

आज किसने दिया जलाया है ।

जिसकी लौ से ये जगमगाया है ।


की न थी ,कल्पना कभी मैंने ।

तूने वो दिन मुझे दिखाया है ।


बच निकलना हुआ है नामुमकिन ।

कैसा ये जाल अब बिछाया  है ।


रह रहे थे जहां बड़े बन कर ।

देना उस घर का अब किराया है ।


घुट गया था मेरा तो पीने से ।

प्यार का घूँट जो पिलाया है ।


करके एहसान तूने मुझपर तो।

एक इक करके हाँ जताया है।


आँख का तारा ,हम तो थे तेरे।

तूने क्यों आँख से गिराया है।


गंदगी घोल दी है धरती पर ।

तूने इसको कहाँ सजाया है।


बस बिगाड़ा है तूने धरती को ।

तूने बिगड़ी को कब बनाया है ।

12.22pm 30 April 2021