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Monday, 12 July 2021

1705 Ghazal गज़ल :वो, करते थे प्यार बस दिखाने को

 Punjabi version 2423

English version 3414

2122 1212 22

काफि़या आने

रदीफ़ को

 हैं वो बेताब पास आने को।

कह के थे जो गए भुलाने को।


जो थे वादा वो ले गए हमसे।

हमको बरसों लगे निभाने को।।


मुझ पे जो था किया सितम उसने।

 दिल नहीं भूलता फसाने को।


 मिलते हैं प्यार से जो दिल वाले।

 क्या हो जाता है इस जमाने को।।


कैसे होता यकीन हमको ,वो।

करते थे प्यार बस दिखाने को।।


 रहते थे पास दिल के जो मेरे ।

अब हैं बेताब दूर जाने को।।


याद आते रहे हमेशा वो,

 जिद थी दिल से जिन्हें भुलाने को।।

10.28am 12 July 2021     

1 comment:

Balbir said...

वो जब याद आए बहुत याद आए